देवरिया :: श्रावण मास में श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर मेंदीपट्टी में उमड़ेगा आस्था का सैलाब, पुलिस सुरक्षा के बीच होगा जलाभिषेक व रुद्राभिषेक
राजू प्रसाद श्रीवास्तव, कुशीनगर केसरी, देवरिया। श्रावण मास के पावन अवसर पर विकास खंड पथरदेवा के अंतर्गत ग्राम सभा मेंदीपट्टी स्थित प्राचीन श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का केंद्र बनने जा रहा है। सावन के प्रत्येक सोमवार तथा पूरे श्रावण मास में यहां हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर परिसर की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाने – संवारने का कार्य अंतिम चरण में है और स्थानीय लोगों में भी इसको लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर अध्यक्ष सुरेंद्र लाल श्रीवास्तव के दिशा-निर्देश में मंदिर परिसर की साफ-सफाई, रंग-रोगन, विद्युत सजावट, पुष्प सज्जा तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। मंदिर प्रबंधन समिति का कहना है कि श्रावण मास शुरू होने से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
इस दौरान मंदिर अध्यक्ष सुरेंद्र लाल श्रीवास्तव ने बताया कि श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। सावन के पूरे महीने यहां भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर समिति का प्रयास है कि प्रत्येक श्रद्धालु को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित वातावरण में पूजा-अर्चना करने का अवसर मिले। इसके लिए स्वयंसेवकों की भी ड्यूटी लगाई जाएगी, जो श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करेंगे। श्रावण मास में विशेष रूप से कांवरियों और शिवभक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहेगा। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए जाएंगे। पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ यातायात व्यवस्था को भी सुचारु बनाए रखने की तैयारी की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। प्रशासन का उद्देश्य है कि धार्मिक आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर की ख्याति केवल आसपास के गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों और देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोग भी यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु विदेशों में रहने के बावजूद सावन के अवसर पर अपने गांव लौटकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर को क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है।
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। वर्षों से लोग अपनी सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन की सफलता के लिए यहां पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। अनेक श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद पुनः मंदिर पहुंचकर विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और भंडारे का आयोजन भी कराते हैं। मंदिर परिसर में सावन के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहता है। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं। भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री से विधिवत अभिषेक किया जाता है। मंदिर में पूरे दिन हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहता है। शिवभक्ति में लीन श्रद्धालुओं के भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मंदिर परिसर की स्वच्छता बनाए रखें, प्रशासन एवं स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। समिति ने यह भी आग्रह किया है कि श्रद्धालु अपनी पूजा सामग्री निर्धारित स्थान पर ही रखें और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। ग्रामीणों का कहना है कि श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं का भी प्रतीक है। हर वर्ष सावन के दौरान यहां विभिन्न गांवों के लोग एक साथ जुटते हैं और धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव का संदेश भी देते हैं। श्रावण मास के शुभ अवसर पर श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर मेंदीपट्टी एक बार फिर शिवभक्ति के रंग में रंगने को तैयार है। आकर्षक सजावट, सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था, मंदिर समिति की सक्रियता और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इस धार्मिक आयोजन को भव्य और यादगार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। श्रद्धालुओं को विश्वास है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से इस वर्ष भी सावन का पर्व श्रद्धा, शांति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न होगा।
