कुशीनगर :: डीएम ने एक झटके में बदले समीकरण, वर्षों से जमे लेखपालों की हिलाया कुर्सी के चुर्ले
🔴 डीएम का प्रशासनिक प्रहार 63 लेखपालों के तबादले से विभाग में मचा हड़कंप।
🔴 कसया में वर्षों से जमे राधेश्याम सिंह का भी हुआ तबादला, धरी रह गयी रसूख, पैरवी और पकड़।
सतेन्द्र पाण्डेय, कुशीनगर केसरी, कुशीनगर। वर्षों से एक हीं तहसील में जमे लेखपालों पर आखिरकार जिलाधिकारी का प्रशासनिक डंडा चल हीं गया। लंबे समय से तबादला नीति की अनदेखी कर अंगद के पांव की तरह जमे कर्मचारियों को हटाने की कार्रवाई से राजस्व महकमे में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी के इस कदम को प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ी पहल माना जा रहा है।
बताते चलें जनपद में लंबे समय से एक हीं तहसील में अंगद के पांव की तरह जमे बैठे लेखपालों पर आखिरकार जिलाधिकारी का डंडा चल हीं गया। प्रशासनिक कसावट और राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी के निर्देश पर एक झटके में 63 लेखपालों का स्थानांतरण कर दिया गया है। कहना ना होगा कि डीएम के सख्त रुख ने आखिरकार उन लेखपालों की जमी-जमाई बादशाहत पर चोट कर दी है, जो वर्षों से एक ही तहसील में जमे हुए थे। लेखपालों के सामूहिक स्थानांतरण की सूची में सबसे अधिक चर्चा लेखपाल राधेश्याम सिंह के नाम की हो रही है, जो तकरीबन एक वर्ष पूर्व हुए स्थानांतरण के बाद भी कसया तहसील छोडने का नाम नही ले रहे थे अब उनकी विदाई कसया से तय है क्योंकि उनका स्थानांतरण भी तमकुहीराज तहसील कर दिया गया है।
बता दें जारी आदेश के अनुसार पडरौना, कसया, हाटा, खड्डा, तमकुहीराज और कप्तानगंज तहसीलों में तैनात लेखपालों को एक-दूसरे तहसीलों में भेजा गया है। वर्षों से एक हीं क्षेत्र में जमे कई लेखपालों को हटाकर नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
टूटा स्थायी तैनाती का मिथक……. राजस्व विभाग में अक्सर यह चर्चा रहती है कि कुछ कर्मचारी वर्षों तक एक ही क्षेत्र में जमे रहते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रभाव और नेटवर्क मजबूत हो जाता है। इस बार प्रशासन ने ऐसे समीकरणों को तोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। स्थानांतरण सूची में ऐसे कई नाम शामिल हैं जो लंबे समय से एक ही तहसील में कार्यरत थे। प्रशासनिक गलियारों में माना जा रहा है कि यह कार्यवाही राजस्व कार्यों की निष्पक्षता बढ़ाने और स्थानीय प्रभाव को समाप्त करने की रणनीति का हिस्सा है।
पडरौना से कप्तानगंज और तमकुहीराज तक बदले समीकरण….. तबादला आदेश में सबसे अधिक फेरबदल पडरौना, कसया और कप्तानगंज तहसीलों में देखने को मिला। कई लेखपालों को पडरौना से कप्तानगंज, खड्डा और तमकुहीराज भेजा गया है, जबकि अन्य तहसीलों से भी बड़ी संख्या में लेखपालो को नई तैनाती दी गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी स्थानांतरित लेखपाल तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त होकर अपनी नई तैनाती स्थल पर योगदान सुनिश्चित करें। साथ हीं उनका वेतन भी नवीन तैनाती स्थल से ही आहरित किया जाएगा।
कार्यालयों में चर्चाओं का बाजार गर्म…… तबादला सूची जारी होने के बाद तहसील और राजस्व कार्यालयों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कुछ कर्मचारी इसे प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने की दिशा में सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कई लोगों के लिए यह आदेश अप्रत्याशित साबित हुआ है।
वहीं सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरण नीति के तहत आगे भी राजस्व विभाग में समीक्षा की जा सकती है और लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अन्य कर्मचारियों पर भी स्थानांतरण की कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल इतना तय है कि जिलाधिकारी के इस फैसले ने राजस्व विभाग में वर्षों से चले आ रहे रसूख के साम्राज्य को झकझोर स्पष्ट कर दिया है कि शासन की स्थानांतरण नीति से ऊपर कोई नहीं।
जिन्हें कोई नहीं हटा पाया, उन्हें डीएम ने भेज दिया तमकुहीराज…… सूत्र बताते हैं कि कसया तहसील में वर्षों से जमे लेखपाल राधेश्याम सिंह को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।
राजस्व विभाग के गलियारों में चर्चा है कि राधेश्याम सिंह पूर्व में हुए स्थानांतरण आदेशों के बाद भी कसया तहसील में ही बने हुए थे। लंबे समय से एक ही क्षेत्र में कार्यरत रहने के कारण उनका प्रभाव क्षेत्र में काफी मजबूत माना जा रहा था। लेकिन इस बार जिलाधिकारी के कड़े प्रशासनिक फैसले ने उनकी भी जड़ें हिला दीं। ऐसे में जब नई सूची जारी हुई तो राधेश्याम सिंह का नाम सबसे चर्चित नामों में शामिल रहा। मजे की बात यह है कि जिन लेखपालों को हटाना मुश्किल माना जाता था, उन्हें भी इस बार नई तैनाती स्थल के लिए रवाना होना पड़ रहा है।
