देवरिया :: पथरदेवा में गोल-गोल घूम रही है चिकित्सा विभाग की जांच टीम, सीएमओ और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के बीच तालमेल ?
🔴 व्यवस्था जस की तस, डॉक्टरों की मौजूदगी और लाइसेंस प्रक्रिया पर उठ रहे गंभीर सवाल। 🔴 डॉक्टरों की मौजूदगी पर सबसे बड़ा सवाल ? 🔴 तीन बार जांच टीम आने की चर्चा, अब जांच से ज्यादा चाहिए स्पष्ट जवाब।
राजू प्रसाद श्रीवास्तव, कुशीनगर केसरी, देवरिया। पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र में अवैध एवं मानकों के विपरीत संचालित बताए जा रहे निजी अस्पतालों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्एयवाही क बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
बता दें क्षेत्र में अस्पतालों की जांच के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार पहुंच रही हैं और निरीक्षण के बाद वापस लौट जा रही हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि धरातल पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन अस्पतालों को किसी न किसी स्तर पर लाइसेंस अथवा संचालन की अनुमति मिली, वहां निर्धारित मानकों और चिकित्सकों की मौजूदगी की जांच आखिर किस आधार पर की गई? हाल ही में प्रजापति हॉस्पिटल को सील किए जाने के बाद पथरदेवा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियां बढ़ी हैं। इसके बाद भी क्षेत्र के अन्य निजी अस्पतालों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय चर्चा के अनुसार जांच टीम कई बार क्षेत्र में पहुंची और अस्पतालों का निरीक्षण कर वापस लौट गई। चर्चा यह भी है कि जांच के दौरान कुछ अस्पतालों में अनियमितताएं दर्ज की गई हैं। हालांकि इन आरोपों और चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।
🔴 डॉक्टरों की मौजूदगी पर सबसे बड़ा सवाल…… पथरदेवा क्षेत्र में संचालित कुछ निजी अस्पतालों को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण के समय अथवा सामान्य दिनों में अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी सुनिश्चित नहीं रहती। ऐसे में सवाल उठता है कि अस्पतालों को लाइसेंस जारी करने से पहले चिकित्सक, भवन, उपकरण, स्टाफ और अन्य निर्धारित मानकों की जांच किस स्तर पर की गई ? नियमों के अनुसार किसी अस्पताल अथवा चिकित्सा प्रतिष्ठान को पंजीकरण/अनुमति देने की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों की जांच महत्वपूर्ण होती है। स्थानीय स्तर पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की रिपोर्ट भी प्रक्रिया का हिस्सा होती है। ऐसे में यदि किसी अस्पताल में निर्धारित चिकित्सक मौके पर उपलब्ध नहीं हैं तो उसकी मानक पूर्ति की आख्या किस आधार पर तैयार की गई, यह जांच का विषय बन गया है।
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल
पथरदेवा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभात कुमार रंजन की भूमिका को लेकर भी क्षेत्र में सवाल उठ रहे हैं। सवाल पूछे जाने पर उनकी ओर से क्या जवाब दिया गया अथवा विभागीय स्तर पर क्या स्थिति है, इसे लेकर भी लोगों में चर्चा है। हालांकि किसी अधिकारी पर मिलीभगत या अनियमितता का आरोप बिना आधिकारिक जांच और दस्तावेजी प्रमाण के सही नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि किसी अस्पताल का लाइसेंस जारी है और निरीक्षण के दौरान वहां निर्धारित चिकित्सक मौजूद नहीं मिलते, तो लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया और निरीक्षण रिपोर्ट की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
🔴 सीएमओ और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के बीच तालमेल ?
इस पूरे मामले में देवरिया के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और पथरदेवा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के बीच विभागीय समन्वय को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर जांच टीम बार-बार पथरदेवा पहुंच रही है, निरीक्षण कर रही है और वापस जा रही है, तो उसके बाद की कार्रवाई सार्वजनिक क्यों नहीं हो रही? जिन अस्पतालों में अनियमितताएं मिली हैं, उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई और जिन अस्पतालों को मानकों के अनुरूप पाया गया, उसकी रिपोर्ट क्या है? यदि स्वास्थ्य विभाग के पास अस्पतालों की जांच रिपोर्ट उपलब्ध है तो उसे सार्वजनिक किए जाने से स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।
🔴 तीन बार जांच टीम आने की चर्चा
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि अवैध अस्पतालों की जांच के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की टीम लगभग तीन बार पथरदेवा क्षेत्र में आ चुकी है। हर बार टीम के आने से लोगों में उम्मीद जगी कि नियमों के विरुद्ध संचालित अस्पतालों पर प्रभावी कार्रवाई होगी, लेकिन टीम के वापस लौटने के बाद भी कई स्थानों पर स्थिति में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देने की बात कही जा रही है।
इसी बीच कुछ लोगों द्वारा यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि जांच के नाम पर आर्थिक लेन-देन हुआ और टीम वापस चली गई। इस आरोप की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह आवश्यक है कि स्वास्थ्य विभाग स्वयं पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करे कि जांच के दौरान किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन हुआ या नहीं।
🔴 आखिर कार्रवाई केवल सील करने तक सीमित क्यों ?
प्रजापति हॉस्पिटल को सील किए जाने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि क्षेत्र में अन्य अस्पताल भी निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ समान कार्रवाई क्यों नहीं हो रही ? क्या सभी अस्पतालों की जांच एक समान मानकों पर की जा रही है ? क्या प्रत्येक अस्पताल में चिकित्सक की उपलब्धता, पंजीकरण, अग्नि सुरक्षा, भवन की स्थिति, प्रशिक्षित स्टाफ, आवश्यक उपकरण और अन्य अनिवार्य मानकों का सत्यापन किया गया है? यदि जांच में अनियमितता मिली है तो विभाग को यह भी बताना चाहिए कि कितने अस्पतालों को नोटिस दिया गया, कितनों के लाइसेंस निलंबित अथवा निरस्त किए गए और कितनों को मानक पूरा करने के लिए समय दिया गया।
🔴 अब जांच से ज्यादा चाहिए स्पष्ट जवाब
पथरदेवा की जनता अब केवल जांच टीम के आने-जाने की तस्वीर नहीं, बल्कि जांच के परिणाम और कार्रवाई का स्पष्ट विवरण चाहती है। यदि अस्पताल नियमों के अनुरूप हैं तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और यदि अनियमितताएं हैं तो जिम्मेदार संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। सबसे अहम सवाल यही है कि जब किसी अस्पताल में निर्धारित डॉक्टर मौके पर उपलब्ध नहीं हैं, तो उसके लाइसेंस की प्रक्रिया में चिकित्सक की उपलब्धता और मानकों का सत्यापन किस आधार पर किया गया? इस सवाल का जवाब केवल पथरदेवा ही नहीं, बल्कि पूरे देवरिया स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का समाधान कर सकता है। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन आरोपों और सवालों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है और क्या पथरदेवा में चल रही जांच वास्तव में धरातल पर कार्यवाही में बदलती है या फिर जांच टीमों का आना-जाना यूं हीं जारी रहता है।
