देवरिया :: मां के नौवे स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा के साथ मनाई गई रामनवमी
राजू प्रसाद श्रीवास्तव, कुशीनगर केसरी, देवरिया। रामनवमी नवरात्रि के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की गई , जो सभी प्रकार की सिद्धियों (आध्यात्मिक शक्तियों) की दात्री हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने इनकी घोर तपस्या कर आठ सिद्धियाँ प्राप्त की थीं, जिसके बाद देवी की कृपा से शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वे अर्धनारीश्वर कहलाए। माँ सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान हैं और चार भुजाओं में गदा, चक्र, शंख व कमल धारण करती हैं। सृष्टि की शुरुआत – जब सृष्टि की रचना हुई, तब हर तरफ अंधकार था। तब भगवान रुद्र (शिव) ने माता आदि शक्ति की पूजा किया। माता आदि शक्ति निराकार रूप में प्रकट हुईं और भगवान शिव के बाएं भाग से माँ सिद्धिदात्री के रूप में अवतार लिया।
त्रिदेव को शक्तियाँ, माता सिद्धिदात्री ने हीं ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) को क्रमवार सृष्टि की रचना, पालन और संहार करने की शक्तियाँ (सिद्धि) प्रदान की थीं। भगवान शिव ने माता सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर माता ने उन्हें अणिमा, महिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, गरिमा, लघिमा, ईशित्व और वशित्व जैसी आठ प्रमुख सिद्धियाँ प्रदान किया।
अर्धनारीश्वर स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ, जिसके बाद वे अर्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों की प्राप्ति होती है। उनकी उपासना से ज्ञान, स्पष्टता और अज्ञानता का नाश होता है। नवरात्रि के अंतिम दिन (महानवमी) इनकी पूजा के साथ हीं नवरात्र का अनुष्ठान पूरा हो गया।
