कुशीनगर :: मुंगेरीलाल का हसीन सपना दिखाकर करोड़ों – करोड़ रुपये की आस्था ट्रेडिंग कंपनी ने किया ठगी, जांच में जुटी क्राइम ब्रांच

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🔴 निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाला आस्था ट्रेडिंग कंपनी के धोखाधड़ी की जांच में जुटा क्राइम ब्रांच
🔴 क्राइम ब्रांच कर रही है विश्वजीत श्रीवास्तव और उसके गुर्गों की तलाश, बचना हुआ नामुंमकिन।

आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव, कुशीनगर केसरी, कुशीनगर। कुछ हीं दिनों में रोडपति से लाखपति फिर करोड़पति बनिए। रुपये लगाइए और खूब मुनाफा कमाइए। मुंगेरीलाल का यहीं हसीन सपना दिखाकर आस्था ट्रेडिंग कंपनी ने बिहार, झारखंड सहित यूपी के कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, महराजगंज, लखनऊ व कानपुर आदि शहरों के सैकड़ों लोगों से करोड़ों – करोड़ रुपये की ठगी की है। कम्पनी द्वारा किये गये धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब इस कम्पनी के झासे में फंसकर निवेशकों ने अपनी गाढ़ी कमाई कंपनी मे लगा दी लेकिन जब निवेशकों को मुनाफे के साथ रिटर्न धनराशि देने का समय आया तो कम्पनी के दफ्तर के दरवाजे पर ताला लटकता मिला। इसके बाद निवेशकों को खुद को ठगी का शिकार होने का एहसास हुआ और निवेशक आस्था ट्रेडिंग कंपनी के संचालक विश्वजीत श्रीवास्तव और उनकी पत्नी चंदा के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने का अभियान शुरू किया। वहीं कहना ना होगा कि आस्था ट्रेडिंग कंपनी के संचालक विश्वजीत का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी संदिग्ध है। उसके खिलाफ लखनऊ में भी इसी तरह का मुकदमा दर्ज है।
बता दें गौर करने वाली बात है कि निवेश का झांसा देकर करोड़ों रुपये हडपने वाले गिरोह का सरगना विश्वजीत श्रीवास्तव ने तकरीबन एक दशक मे सीएम योगी के गृह जनपद गोरखपुर सहित पूर्वांचल के कमोबेश सभी जिलों में धोखाधड़ी का साम्राज्य खडा कर लिया था। बताया जाता है कि वर्ष 2016 में गोरखपुर के चरगांवा राणा हास्पिटल के पास उसने अपना पहला कार्यालय खोला और खुद को ट्रेडिंग एक्सपर्ट बताते हुए लोगो का भरोसा जीता इसके बाद ठगी के जाल को मजबूत करने के लिए नेटवर्क मार्केटिंग शुरू की, जिसके जरिए उसने अपने नेटवर्क को बिहार व झारखंड तक फैला दिया।
आपको बता दें कि ऐसी चर्चा है कि आस्था ट्रेडिंग कंपनी विगत कुछ साल पहले ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से निवेशकों को जोड़ना शुरू किया था। कंपनी के कर्मचारी 10 से 20 प्रतिशत महीने के रिटर्न का लालच देते थे। निवेशक जितनी बड़ी रकम लगाते, कंपनी उसी अनुपात में अधिक मुनाफे का दावा करती थी। शुरुआत में कुछ लोगों को पेमेंट कर कंपनी ने विश्वास जीता, फिर अचानक सर्वर डाउन, खाते सीज और ऑडिट जैसी बहानेबाजी शुरू हो गई।
धीरे-धीरे कार्यालय बंद हो गए, फोन स्विच ऑफ और वेबसाइट भी बंद हो गई। इसी ठगी के खिलाफ लखनऊ के क्राइम ब्रांच के अलावा गोरखपुर के शाहपुर, गुलरिहा और देवरिया मे धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और आईटी एक्ट के तहत विश्वजीत श्रीवास्तव उनकी पत्नी चंदा श्रीवास्तव सहित दर्जनों लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर तलाश कर रही है।
बता दें पुलिस को दी गई तहरीरों में पीड़ितों ने बताया है कि वे अपने जीवन भर की जमा पूंजी, पेंशन, एलआईसी मनीबैक और जमीन बेचकर प्राप्त धनराशि कंपनी में डाल चुके हैं। ठगी के शिकार अधिकतर मिडिल क्लास परिवार, छोटे व्यापारी, प्राइवेट कर्मचारी और बेरोजगार युवा हुए हैं जिन्हें कंपनी ने कम रुपयों में अधिक मुनाफा कमाने का सपना दिखाया था।
वहीं पुलिस सूत्रों की मानें तो गोरखपुर क्राइम ब्रांच ने जांच में पाया है कि कंपनी के निदेशक ने बिहार, झारखंड के अलावा कानपुर और लखनऊ, गोरखपुर में भी नेटवर्क तैयार किया था। यहां उसके स्थानीय एजेंट निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सेमिनार, होटल मीटिंग और सोशल मीडिया कैंपेन चलाते थे। कंपनी के टारगेट अक्सर ऐसे लोग होते थे जिन्हें फाइनेंस की ज्यादा जानकारी नहीं थी। क्राइम ब्रांच के जांच में यह भी सामने आया कि आस्था ट्रेडिंग कंपनी का एक मुख्य आरोपी मोबाइल लोकेशन बदलता हुआ पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में सक्रिय है। पुलिस टीम उसके संभावित ठिकानों की पहचान कर रही है। इसके अलावा मुख्य आरोपी के दो अन्य गुर्गों की तलाश कानपुर और झारखंड में जारी है।
वहीं आस्था ट्रेडिंग कंपनी के संचालक सहित अन्य लोगों के विरुद्ध दर्ज मुकदमें में पीड़ितों की ओर से दिए गए दस्तावेजों से स्पष्ट है कि कंपनी ने पोंजी स्कीम की तरह निवेशकों के रुपये दूसरे निवेशकों को पेमेंट कर भरोसा दिलाया। इसके बाद करोड़ों रुपये लेकर भाग गई।
वहीं बताया जाता है कि क्राइम ब्रांच ने पीड़ितों से ट्रांजेक्शन डिटेल उपलब्ध कराने को कहा है ताकि ठगी की कुल रकम और संबंधित खातों की पहचान की जा सके। वहीं पुलिस अधिक से अधिक पीड़ितों को सामने आने की अपील कर रही है, क्योंकि आशंका है कि ठगी की वास्तविक रकम दर्ज प्राथमिकी से कई गुना अधिक हो सकती है। क्योंकि यह मामला एक बड़े इंटर-स्टेट फाइनेंशियल फ्रॉड की तरफ इशारा करता है, जिसमें आरोपी संगठित नेटवर्क के साथ काम कर रहे थे।
पोंजी स्कीम एक निवेश धोखाधड़ी है जिसमें नए निवेशकों से जुटाए गए धन का उपयोग मौजूदा निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता है। यह एक जल्दी अमीर बनने की योजना है जो कम या बिना किसी जोखिम के असाधारण रिटर्न का वादा करती है, लेकिन यह अवैध है और अंतत ध्वस्त हो जाती है जब नए निवेशक नहीं मिल पाते या पुराने निवेशक अपना पैसा निकाल लेते हैं। इस प्रकार की धोखाधड़ी का नाम चार्ल्स पोंजी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1920 के दशक में इसे बढ़ावा दिया था। वहीं ट्रेड आस्था कंपनी के निदेशक विश्वजीत श्रीवास्तव, उसकी पत्नी चंदा, नवीन श्रीवास्तव, नवीन चंद्र, मीनाक्षी, हरकेश, सोनू गुप्ता, राहुल, सुदामा कुशवाहा, चंदन शर्मा, फैजल व अविनाश सिंह समेत अन्य को क्राइम ब्रांच की टीम तलाश कर रही है।

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