कुशीनगर :: लेखपाल ने जाति-घोटाला का खेला खेल, दिया हाईकोर्ट को खुली चुनौती
🔴 पडरौना में लेखपाल ने न आदेश माना, न देखा अभिलेख, बाँट डाले एससी प्रमाणपत्र।
🔴 लेखपाल की कारस्तानी हुआ उजागर, जिस जाति का जिले में अस्तित्व नहीं, उसका भी बना दिया प्रमाणपत्र।
🔴 दोष सिद्ध, फिर भी कार्यवाही शून्य, एसडीएम की चुप्पी पर उठ रहे हैं सवाल।
🔴 आरक्षण पर डाका, असली हकदारों के साथ है धोखा।
आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव, कुशीनगर केसरी, पडरौना, कुशीनगर। हाईकोर्ट की स्पष्ट रोक के बावजूद पडरौना सदर तहसील के लेखपाल द्वारा खरवार जाति का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र जारी कर देना पूरे प्रशासनिक तंत्र पर करारा तमाचा है, जी हां जिले के सदर तहसील पडरौना में जो हो रहा है उसे लापरवाही कहें या फिर नियम-कानून, संविधान और सामाजिक न्याय की खुलेआम हत्या। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब न्यायालय के आदेश बेअसर हो जाएं, तो आम जनता किससे न्याय मांगे ? इतना हीं नहीं सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुशीनगर जिले में धनगर जाति का कोई भी दर्ज अभिलेख अस्तित्व में, नहीं बताया जा रहा है। इसके बावजूद नियम-कानून, शासनादेश और राजस्व रिकॉर्ड को ताक पर रखकर लेखपाल अविनाश राव ने प्रमाणपत्र निर्गत कर दिया। लेखपाल की यह कारस्तानी किसी भूल का नतीजा नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित खेल बताया जा रहा है।
बताते चलें जानकारों का कहना है कि हाईकोर्ट ने पहले ही खरवार जाति को एससी प्रमाणित करने पर रोक लगा रखी है। इसके बाद भी प्रमाणपत्र जारी होना यह साबित करता है कि लेखपाल अविनाश राव ने या तो आदेश पढ़े हीं नहीं या फिर जानबूझकर अनदेखी किया। सवाल यह है कि क्या लेखपाल खुद को अदालत से ऊपर मान बैठा है ? या फिर पीछे कोई ऐसा सिस्टम है जो उसे संरक्षण दे रहा है ?
वहीं विधि विशेषज्ञों की माने तो यह मामला व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का नहीं, बल्कि आरक्षण व्यवस्था पर सीधा डाका है। फर्जी या अवैध प्रमाणपत्रों के जरिए जब कोई व्यक्ति लाभ लेता है, तो उसका खामियाजा वास्तविक एससी समाज को भुगतना पड़ता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि मामला सार्वजनिक होने क बावजूद तहसील और जिला प्रशासन की चुप्पी गहरी साजिश की ओर इशारा कर रही है। यदि लेखपाल अकेला दोषी है, तो अब तक निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं गयी ? किसके इशारे व संरक्षण मे लेखपाल यह कारनामा बेखौफ कर रहा है ? सवाल यह भी है कि प्रमाणपत्र जारी करने से पहले लेखपाल ने जाति सत्यापन किया था नहीं ? राजस्व अभिलेखों में जब धनगर जाति दर्ज हीं नहीं है, तो प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी किया गया ? क्या ऐसे और भी प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं ? जनहित में इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
आपको बता दें लेखपाल अनिनाश राव की कारस्तानी को लेकर आम जनमानस में भारी आक्रोश है। गुस्साए लोगों ने जिलाधिकारी से संबंधित लेखपाल अविनाश राव को तत्काल निलंबित किये जाने की मांग किया है। इसके अलावा लेखपाल द्वारा जारी किये अवैध एससी प्रमाणपत्र रद्द किया जाए, पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, समयबद्ध जांच करायी जाए और दोषी पाये जाने पर लेखपाल के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अब देखना दिलचस्प होगा कि जिलाधिकारी क्या करते है ?
वहीं कहना ना होगा कि जांच मे लेखपाल अविनाश प्रताप राव की कारस्तानी पूरी तरह साबित हो चुकी है। तहसीलदार पडरौना की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि लेखपाल ने अधिकारों का घोर दुरुपयोग करते हुए आपत्तिजनक तरीके से जाति प्रमाणपत्र निर्गत किया। रिपोर्ट में निलंबन व विभागीय कार्यवाही की संस्तुति भी दर्ज है। इसके बावजूद उप जिलाधिकारी द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई न करना सिस्टम की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। आखिरकार दोष सिद्ध होने के बाद भी उपजिलाधिकारी पडरौना की दोषी लेखपाल के विरुद्ध कार्यवाही करने से क्यो परहेज कर रहे है ?
