कुशीनगर :: बेटियों के सम्मान की लूट, सरकारी धन की किया खुली डकैती
🔴 मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना पर भ्रष्टाचार का घिनौना हमला।
🔴बीडीओ के पत्र से उजागर हुई समाज कल्याण अधिकारी की काली करतूत।
आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव, कुशीनगर केसरी, कुशीनगर। सरकार द्वारा गरीब, असहाय और वंचित बेटियों के सम्मानजनक विवाह के लिए चलाई गई मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना कुशीनगर जिले में अपने उद्देश्य से भटक कर भ्रष्टाचार की कब्र बनती दिख रही है, जिस योजना को सामाजिक संवेदना और सरकार की नैतिक प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाता था, उसी योजना में बेटियों की खुशियों को नोटों में तौलकर सरकारी धन को निजी तिजोरियों तक पहुंचाने का संगठित खेल खेला गया।
बता दें इस घोटाले की पोल तब खुली जब पडरौना के खंड विकास अधिकारी रवि रंजन द्वारा सीडीओ को भेजें गये एक आधिकारिक पत्र सामने आया। पत्र में दर्ज तथ्य इतने गंभीर हैं कि वे न केवल समाज कल्याण विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि समाज कल्याण अधिकारी की भूमिका को सीधे कटघरे में खड़ा कर रहा हैं। पत्र के अनुसार, विवाह समारोह में वितरित किए गए गृहस्थी सामान की गुणवत्ता निर्धारित मानकों से कोसों दूर पाई गई, जबकि भुगतान और बिलिंग उच्च गुणवत्ता व ऊंची दरों पर दिखाई गई है। हकीकत यह है कि नवविवाहित कन्याओं को जो सामान दिया गया, वह घटिया, सस्ता और कई मामलों में मानवीय गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। कहीं स्टील के नाम पर पतली धातु, कहीं इलेक्ट्रॉनिक सामान की जगह खिलौने जैसे उपकरण, तो कहीं आधा-अधूरा सेट। इतना ही नही कई लाभार्थियों को पूरा सामान मिला ही नहीं। सवाल उठता है कि आखिर बाकी सामान और बची धनराशि कहां गई ? सूत्रों की मानें तो यह सब बिना ऊंचे संरक्षण और विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं था।
वही आरोप यह है कि समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव ने नियमों को रौंदते हुए चहेते आपूर्तिकर्ताओं को ठेके दिए, बाजार दरों से कई गुना अधिक कीमतें दर्शाई गई और वास्तविक आपूर्ति के अंतर को कमीशन और बंदरबांट में तब्दील कर दिया। बीडीओ का पत्र इस पूरे खेल का लिखित सबूत बनकर उभरा है। शर्मनाक पहलू यह है कि इस घोटाले में सबसे ज्यादा नुकसान उन बेटियों का हुआ है, जिनके लिए यह योजना बनी थी। विवाह के पवित्र अवसर पर उन्हें यह एहसास कराया गया कि सरकारी योजनाओं में उनका सम्मान नहीं, बल्कि सिर्फ फाइलों और बिलों की अहमियत है। यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक अपराध है।
अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश यह है कि इस खुलासे के बाद क्या दोषी समाज कल्याण अधिकारी पर तत्काल निलंबन की कार्यवाही होगी ?
बता दें मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह की धज्जियाँ उड़ानें वाले समाज कल्याण अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज और विभागीय जांच होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह प्रभाव और फाइलों के खेल में दफन हो जाएगा ?
वहीं जानकारों का कहना है कि सरकार इस प्रकरण में निर्दोष बेटियों के पक्ष में सख्त और नजीर प्रस्तुत करने वाली दण्डात्मक कार्यवाही नहीं करती है, तो संदेश यहीं होगा कि गरीबों की योजनाएं अब भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन चुकी हैं। विशेषज्ञ कहते है कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की साख बचानी है, तो दोषियों को बेनकाब कर कानून के कठघरे में खड़ा करना अनिवार्य होगा
खंड विकास अधिकारी पडरौना रवि रंजन द्वारा मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव को पत्र संख्या – 1093 स्था. दिनांक – 4 दिसम्बर – 2025 को दिये गये पत्र में कहा गया है कि 4 दिसम्बर 2025 को पडरौना नगर के उदित नारायण इंटर कॉलेज में आयोजित किये गये मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में जो सामग्री दिया गया, वह गुणवत्ताविहीन व बेहद हीं खराब गुणवत्तायुक्त था। जिसका फोटोग्राफ संलग्न है, जब मेरे द्वारा सैंपल सामग्री को देखने की माँग की गई तो उन्हें नहीं दिखाया गया। सामग्री की गुणवत्ता की जाँच, पर्यवेक्षणी अधिकारी परियोजना निदेशक से भी नहीं कराया गया और ना हीं किसी भी सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कराया जा रहा है, जिला समाज कल्याण अधिकारी कुशीनगर मौके पर बिना किसी अधिकारी से सामग्रियों का सत्यापन कराये हीं सभी सामग्री का वितरण करा रहे हैं। बीडीओ ने उक्त सामूहिक विवाह में घटिया भोजन का भी उल्लेख किया है। उन्होने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सामूहिक विवाह में खाने की गुणवत्ता भी अति खराब थी, खाना सुबह आठ बजे हीं बनवाकर पैक करवा दिया गया था, उनके द्वारा जब जाँच किया गया तब जाकर पनीर की सब्जी को थाली में सम्मिलित किया गया। बीडीओ ने पत्र मे आगे लिखा है कि कार्यक्रम समाप्ति के समय जब विधायक पडरौना वापस जा रहे थे, उस समय तक वीआईपी भोजन स्टाल तैयार नहीं था, जिसका फोटोग्राफ संलग्न है। बीडीओ ने समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव पर मनमानेपन का आरोप लगाते हुए खुद को नोडल अधिकारी के जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए मनमानी कर रहे समाज कल्याण अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाने के लिए सीडीओ से अनुरोध भी किया है।
