कुशीनगर :: मुख्यमंत्री जी ! डीएम-सीडीओ कार्यालय के सामने नियमों की हत्या, ठेकेदार बेलगाम, अफसर बने मौनी बाबा

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🔴 कलेक्ट्रेट की दहलीज पर पांच करोड़ की लूट, बुद्धा पार्क बना भ्रष्टाचार का खुला स्मारक।
🔴निगरानी शून्य, गुणवत्ता गायब – पांच करोड़ की परियोजना संदेह के घेरे में।

आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव, कुशीनगर केसरी, कुशीनगर। जनपद की कानून-व्यवस्था, विकास और जवाबदेही का जहां से संचालन होता है, ठीक उसी कलेक्ट्रेट की दहलीज पर यदि करोड़ों रुपये की खुली लूट चल रही हो और जिम्मेदार अफसर आंख मूंदे बैठे हों, तो इसे विकास नहीं बल्कि सिस्टम की शर्मनाक विफलता हीं कहा जाएगा।
जी हां हम बात कर रहे हैं रविन्द्रनगर स्थित कलेक्ट्रेट के सामने बुद्धा पार्क में लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत से कराये जा रहे निर्माण कार्य विकास के नाम पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और सरकारी धन की खुली बंदरबांट का जीता-जागता तस्वीर पेश कर रहा है।
आपको बता दें कि कलेक्ट्रेट के सामने और मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय से सटे बुद्धा पार्क में व्यायामशाला, कार्यालय सह गोदाम और पाथ-वे जैसे निर्माण कार्य प्रगति पर बताए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यहां न तकनीकी मानकों का पालन हो रहा है, न गुणवत्ता की कोई परवाह है और न ही निगरानी का कोई ठोस इंतजाम, नतीजतन हर स्तर पर नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। करोड़ों रुपये की लागत वाला निर्माण देखने में हीं कमजोर और घटिया प्रतीत हो रहा है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका नहीं बल्कि पुष्टि होती नजर आती है।
वहीं गंभीर सवाल यह है कि यह सब कुछ जिलाधिकारी कार्यालय की सीधी नजरों के सामने हो रहा है, फिर भी अब तक न कोई जांच, न कोई आपत्ति और न ही कोई जवाबदेही तय की गई। ऐसे में कहना मुनासिब होगा कि जिम्मेदार अधिकारी क्या इस भ्रष्टाचार से अनजान हैं या फिर जानबूझकर मौन साधे हुए हैं ? यह मौन स्वयं में कई सवाल खड़े करता है।
बताते चलें कि बुद्धा पार्क मे तकरीबन पांच करोड रुपये की लागत से हो रहे निर्माण कार्य पर नजर दौडायें तो यहां मानकों की धज्जियां उडायी जा रही है, जिम्मेदार नदारद है, निर्माण स्थल पर न तो गुणवत्ता जांच से संबंधित कोई सूचना बोर्ड लगा है, न हीं कार्यदायी संस्था का स्पष्ट विवरण दर्ज है और न ही किसी अभियंता या अधिकारी की नियमित उपस्थिति दिखाई देती है। जानकारो का दावा है कि सरकारी निर्माण कार्यों में अनिवार्य तकनीकी और निगरानी की व्यवस्था यहां पूरी तरह से गायब है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति आपराधिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जिले के सबसे संवेदनशील और निगरानी वाले क्षेत्र में यह स्थिति है, तो दूर-दराज क्षेत्रों में चल रहे निर्माण व विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। यह परिदृश्य अंधेर नगरी, चौपट राजा की कहावत को साकार करता प्रतीत हो रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर किसके संरक्षण मे यहा मानकों की धज्जियाँ उडाई जा रही है ?
आपको बता दें बेशक ! यह मामला सिर्फ निर्माण की खामियों का नहीं है बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई पांच करोड रुपये की संभावित लूट का गंभीर प्रश्न बन चुका है। ऐसे मे ठेकेदार और अधिकारियों के गठजोड़ कीआशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण कार्य का एस्टीमेट किसने तैयार किया और किन मानकों पर पास किया गया ? अब तक की गई गुणवत्ता जांच की रिपोर्ट कहां है? निर्माण कार्य किस अधिकारी की निगरानी में कराया जा रहा है ?
इस दौरान मौके पर जेई और अभियंताओं की नियमित उपस्थिति क्यों नहीं ? प्रयुक्त सामग्री की तकनीकी और प्रयोगशाला जांच कब और कैसे हुई ? यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्यवाही नहीं की गई, तो बुद्धा पार्क आने वाले समय में विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का स्थायी स्मारक बनकर रह जाएगा। इस संबध में निर्माण कार्य की देखरेख व निगरानी करने वाले जेई वेदांत भट्ट का कहना है कि वह हमेशा मौके पर रहते है निर्माण कार्य बिल्कुल मानक के अनुरूप हो रहा है, कोई कमी नही है। उन्होने कहा कि डीएम कार्यालय के सामने निर्माण का हो रहा है गडबड़ी की कोई गुंजाइश नही है डीएम साहब अक्सर निरीक्षण करते रहते है।

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