कुशीनगर :: छापामारी में रंगे हाथ पकड़े गए… लेकिन फिर भी सील होटल नही हुआ सील, न हीं संचालक पर हीं हुई कार्यवाही, आखिर क्यों

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🛑 देह व्यापार पर ‘डमी छापेमारी’! मनोकामना होटल पर कार्रवाई शून्य, कसया पुलिस कटघरे में।

डेस्क कुशीनगर केसरी, कुशीनगर। बुद्धनगरी में देह व्यापार के गोरखधंधे में लिप्त मनोकामना होटल पर कसया पुलिस द्वारा की गई कथित छापेमारी अब एक सुनियोजित नाटक साबित होती दिख रही है। छापेमारी के दौरान होटल के कमरों में रंगरलियां मनाते पकड़े गए युवक-युवतियों के बावजूद न तो होटल सील किया गया, न ही संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। यह सवाल नहीं, बल्कि कसया पुलिस की नीयत पर सीधा आरोप है।
स्पष्ट है कि कसया पुलिस अपराध पर अंकुश लगाने के बजाय, देह व्यापार जैसे समाज विरोधी अपराध को मौन संरक्षण देने की भूमिका में नजर आ रही है। यह चुप्पी कोई साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि संरक्षण की चीखती हुई गवाही है जो कानून व्यवस्था के दावों को खोखला साबित करती है।
बेशक! यह मामला सिर्फ अनैतिक गतिविधियों तक सीमित है, बल्कि कसया पुलिस की कार्यशैली, जवाबदेही और ईमानदारी पर सीधा हमला है। अगर यही कानून व्यवस्था है, तो सवाल उठना लाजमी है कि एनएच-28 पर होटल संचालित हो रहे हैं या पुलिस की छत्रछाया में खुलेआम ऐय्याशी के अड्डे फल-फूल रहे हैं?

कहना न होगा कि कसया पुलिस को लंबे समय से मनोकामना होटल में देह व्यापार व अन्य अवैध गतिविधियों की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर पुलिस ने होटल पर छापेमारी की थी, जहां चार जोड़े युवक-युवतियां रंगरलियां मनाते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर थाने लाकर पूछताछ करने और कड़ी कार्रवाई का दावा किया था।
लेकिन यह दावा भी हवा-हवाई साबित हुआ। छापेमारी के कुछ ही समय बाद सब कुछ सामान्य हो गया है, न होटल सील हुआ, न संचालक पर मुकदमा दर्ज हुआ। यह स्थिति अपने आप में एक यक्ष प्रश्न खड़ा करती है और कसया पुलिस की मंशा पर गहरे संदेह की लकीर खींचती है।

🔴 जब 2023 में सील हुआ था मनोकामना होटल, फिर किसके इशारे पर खुला ?

गौरतलब है कि 22 सितंबर 2023 को तत्कालीन उपजिलाधिकारी योगेश्वर सिंह के निर्देश पर कसया के तत्कालीन तहसीलदार नरेंद्र राम और तत्कालीन थानाध्यक्ष डॉ. आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम ने मनोकामना होटल पर छापा मारा था। उस दौरान होटल में कई युवक-युवतियां संदिग्ध हालत में पकड़े गए थे। पूछताछ के दौरान होटल संचालक द्वारा कोई भी वैध रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके बाद तहसीलदार ने होटल को सील कर दिया गया था। सवाल यह है कि जब होटल अवैध और देह व्यापार कारोबार में लिप्त पाकर सील किया जा चुका था, तो फिर यह होटल किसके आदेश पर दोबारा बेखौफ संचालित हो रहा है? क्या मनोकामना होटल का संचालक किसी ऊंचे रसूख की छत्रछाया में है? या फिर होटल की आड़ में चल रहे इस समाज-विरोधी धंधे को प्रशासनिक यख फिर राजनीति संरक्षण प्राप्त है?

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