कुशीनगर :: एएनएम भर्ती घोटाला मामले में संविदाकर्मियों को बर्खास्त करने का आदेश बना कागजी तमाशा

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🔴 बर्खास्तगी के बाद भी संविदाकर्मी कर रहे है खुलेआम नौकरी, योगी सरकार में आदेशों की उड़ रही है धज्जियां।
🔵 तत्कालीन डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने की थी संविदाकर्मी सिद्धनाथ और रितेश के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्यवाही।

डेस्क कुशीनगर केसरी, कुशीनगर। जनपद के एएनएम भर्ती प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरतने वाले संविदाकर्मियों के बर्खास्त करने का आदेश कागजी तमाशा बनकर रह गया है। हैरानी की बात तो यह है कि बर्खास्त घोषित किये गये संविदाकर्मी सिद्धनाथ तिवारी और रितेश तिवारी सीएमओ कार्यालय में बेधड़क नौकरी कर रहे हैं।
यहां कहना ना होगा कि विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद संविदाकर्मी सिद्धनाथ तिवारी व रितेश तिवारी के खिलाफ बर्खास्तगी के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन आज भी यह संविदाकर्मी बेखौफ होकर अपने पदों पर जमे हुए हैं। ऐसे मे इसे प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना है कही जाए या फिर इन कर्मचारियों के रसूख का प्रभाव।
बताते चलें कि संविदाकर्मी सिद्धनाथ तिवारी एवं रितेश तिवारी ने एएनएम भर्ती में नियमों को ताक पर रखकर अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया था। पात्रों द्वारा इन कर्मियो के खिलाफ की गई शिकायतो की जांच के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर तत्कालीन सीएमओ ने बर्खास्तगी के आदेश तो जारी किये, लेकिन संबंधित अधिकारियों की उदासीनता और कथित संरक्षण के चलते आज भी यह संविदाकर्मी नियम विरुद्ध व फर्जी तरीके से नौकरी कर रहे है जो सिस्टम को कटघरे में लाकर खडा कर दिया है।
बता दें गौर करने वाली बात यह है कि तकरीबन साढ़े तीन वर्ष पूर्व संविदा एएनएम की भर्ती में अभ्यर्थियों द्वारा तत्कालीन जिलाधिकारी एसराज लिंगम से धांधली की शिकायत की गयी थी। मामले को गंभीरता से लेकर डीएम एस राज लिंगम ने जांच कमेटी गठित करके सीएमओ को रिपोर्ट देने का आदेश दिया। कमेटी ने जब जांच की तो इस बात का खुलासा हुआ कि चयन प्रक्रिया में निर्धारित मानकों को दरकिनार कर संविदा एएनएम का चयन किया गया है। नतीजतन धांधली करते हुए पुरी की गई भर्ती प्रक्रिया मे निजी लाभ के संकेत सामने आये,जाच मे शिकायतो की पुष्टि व सच्चाई सामने आने पर चयन प्रक्रिया में शामिल चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों से विभागीय स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन आरोपी अधिकारी और दोनों संविदा कर्मचारी सिद्धनाथ तिवारी व रितेश तिवारी ने संतोषजनक उत्तर नहीं दिए। लापरवाही और मनमाना रवैया सामने आने पर तत्कालीन डीएम एसराज लिंगम ने एसीएमओ डॉ. जेएन सिंह, संविदा कर्मचारी एनएचएम के जिला कार्यक्रम अधिकारी सिद्धनाथ तिवारी और जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता रितेश तिवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए सीएमओ को निर्देश दिया। इसके बाद 26 जून-2022 को तत्कालीन सीएमओ सुरेश पटारिया की तहरीर पर एसीएमओ डॉ. जेएन सिंह, संविदा कर्मचारी जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता
रितेश तिवारी और। जिला कार्यक्रम अधिकारी सिद्धनाथ तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज की गयी थी। इतना हीं नहीं डीएम के आदेश के अनुपालन में सीएमओ डाॅ. पटारिया ने एसीएमओ के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही करने क लिए जहा शासन को पत्र भेजा था, वही ने संविदा पर तैनात सिद्धनाथ तिवारी और रितेश तिवारी के खिलाफ बर्खास्तगी की सिफारिश की थी।
सवाल पे सवाल यह है कि जब दोष सिद्ध होने के बाद भी बर्खास्तकर्मी नौकरी करते रहेंगे, तो ईमानदार कर्मचारियों और योग्य अभ्यर्थियों को न्याय कैसे मिलेगा ? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में धृतराष्ट्र बने हुए है ? यह भी एक सवाल है।

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