कुशीनगर :: मानवाधिकार कार्यकर्त्ता ने धर्मांतरण व दुष्कर्म मामले में निष्पक्ष जांच व पीड़िता को सुरक्षा मुहैया कराने की किया मांग

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🔴 मानवाधिकार कार्यकर्त्ता सूर्यप्रताप मिश्र ने राष्ट्रीय मानवाधिकार को भेजा पत्र, किया चार सूत्रीय मांग।
🔴 वर्ल्ड यूथ सोशल ऑर्गेनाइजेशन के पत्र पर मानवाधिकार आयोग ने एसपी को नोटिस जारी कर मांगा था विस्तृत रिपोर्ट।

आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव, कुशीनगर केसरी, कुशीनगर। बीते माह लखनऊ में आयोजित प्रेसवार्ता में कुशीनगर जनपद की अनामिका नामक युवती द्वारा विश्व हिन्दू रक्षा परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय के माध्यम से धर्मांतरण, दुष्कर्म व छांगुर गैंग से कनेक्शन के लगाये गये आरोपों के बाद नौशाद, छांगुर, आलमगीर समेत तेरह लोगों पर दर्ज हुए मुकदमें की निष्पक्ष जांच कराने व पीड़िता को सुरक्षा मुहैया कराने सहित विभिन्न मांगों को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्त्ता सूर्यप्रताप मिश्र ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर कार्यवाही की मांग किया है।
बता दें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक को नई दिल्ली को भेजे गये पत्र में मानवाधिकार कार्यकर्त्ता सूर्यप्रताप मिश्र ने कहा है कि बीते माह 19 अगस्त को लखनऊ में आयोजित प्रेसवार्ता के माध्यम से कुशीनगर जनपद की युवती अनामिका सिंह द्वारा कसया के रेड हिल्स रियल एस्टेट कंपनी के मालिक आलमगीर अंसारी सहित कुल 13 व्यक्तियों पर लव जिहाद, जबरन धर्मांतरण, मानव तस्करी एवं यौनशोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। इस प्रकरण में पीड़िता की लिखित शिकायत पर कोतवाली पडरौना में अपराध संख्या- 452/2025, धारा- 376-डी, 377, 342, 323, 504, 120-बी तथा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा- 3 एवं 5(1) के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत हुआ है। पत्र में आगे लिखा है कि उक्त मामले में वर्ल्ड यूथ सोशल ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष शशिकांत मिश्र द्वारा आपको ईमेल प्रेषित कर उच्चस्तरीय जांच कराने का अनुरोध किया गया था। आपके निर्देश पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केस संख्या- 17675/24/45/2025- डब्लूसी दर्ज कर 10 सितम्बर-2025 को पुलिस अधीक्षक, कुशीनगर को नोटिस जारी करते हुए विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।
इस दौरान मानवाधिकार कार्यकर्त्ता ने अपने पत्र में कहा है कि मामला रसूखदार एवं प्रभावशाली व्यक्तियों से संबंधित है, इसलिए आरोपी, पीड़िता एवं उसके परिजनों पर निरंतर दबाव बना रहे हैं। पीड़िता के विभिन्न वीडियो बनवाकर उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित कराया जा रहा है, जिससे जनमानस में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है तथा जांच प्रक्रिया प्रभावित होने का खतरा है। यह स्थिति पीड़िता एवं उसके परिजनों के आत्मविश्वास को कमजोर करने का स्पष्ट प्रयास है।
वहीं अपने पत्र में मानवाधिकार कार्यकर्त्ता श्री मिश्र ने पीड़िता एवं उसके परिजनों की तत्काल सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने, पीड़िता का मजिस्ट्रेट के समक्ष शीघ्र बयान दर्ज कराने, अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी अथवा पूछताछ न किये जाने पर संबंधित पुलिस को नोटिस जारी करने व निष्पक्ष एवं तथ्यपरक जांच कर शीघ्र आरोपियों की पहचान कर कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है।

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